Wednesday, December 9, 2015
Friday, December 4, 2015
Saturday, November 21, 2015
Maharishi Dayanand Quotes
जितने मनुष्य से भिन्न जातिस्थ प्राणी है उनमे दो प्रकार का स्वाभाव है बलवान से डरना, निर्बलो को डराना और पीड़ा देना, अर्थात दुसरे का प्राण तक निकालके अपना मतलब साध लेना, ऐसा देखने में आता है | जो मनुष्य ऐसा स्वाभाव रखता है उसको भी इन जातियों में गिनना उचित है, परन्तु जो निर्बलो पर दया, उनका उपकार आर निर्बलो को पीड़ा देनेवाले अधर्मी बलवानो से किंचितमात्र भी भय शंका न करे इनको परपीड़ा से हटाके निर्बलो की रक्षा तन,मन,धन से सदा करना ही मनुष्य जाती का निजगुन है, क्यों की जो बुरे कामो के करने में भय और सत्य कामो के करने में किंचित भी भय-शंका नहीं करते वे ही मनुष्य धन्यवाद् के
पात्र कहाते है |
----- स्वामी दयानंद सरस्वती ----
ओ3म् का अर्थ
यह ओ3म् शब्द परमेश्वर का सर्वोतम नाम है, क्योंकि इसमे जो अ, उ , म है इन तीन से मिलकर एक ओउम समुदाय बना है है, इस एक नाम में परमेश्वर/ईश्वर के बहुत नाम आते है जैसे अकार से विराट, अग्नि , और विश्वादी.
ओ--> ओ बोलने पर मुंह खुलता है
3---> बोलने पर खुला रहता है
म् --> बोलने पर बंद हो जाता है
3---> बोलने पर खुला रहता है
म् --> बोलने पर बंद हो जाता है
अतः ओ3म् बोलने पर मुंह खुलता है और बंद हो जाता है|
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